चुनाव की घोषणा हुई नहीं कि दूसरे दिन भाजपा की जीत की खबर भी आ गई !

जी हां, गौर करिए इस जीत की खबर का रहस्य। इस ख़बर का आधार सिर्फ महिलाओं को 10,000 रुपए मिलने की घोषणा है जो चुनाव घोषणा के ठीक पहले उनके अकाउंट में भेज दिए गए। जो सीधे-सीधे उनके परिवार की वोट पाने के लिए दी गई रिश्वत है। सरकार सरकारी धन का कैसा बेजा इस्तेमाल कर रही है और चुनाव आयोग उससे महान है वह उनके बंटने का इंतजार करता रहा। जैसे ही बंटने का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ चुनाव की घोषणा हो गई। यह मोदी काल में सम्पन्न सभी चुनावों में हमेशा होता रहा है। इस बीच बिहार विकास पर केंद्रित कई चुनावी घोषणाएं केन्द्र और राज्य सरकार की कम थीं, जो महिलाओं को प्रलोभन हेतु यह राशि भी आवंटन की ज़रूरत पड़ी।

यह उनका आजमाया हुआ हथियार है। मध्यप्रदेश में लाडली-बहना के नाम पर तीन चुनावों में भाजपा ने भरपूर फायदा लिया। अन्य राज्यों में भी यह स्कीम चालू है। दिल्ली चुनाव में जीतने के बाद 2500₹ एक मुश्त राशि देने की बात की गई थी किंतु आज तक यह क्रियान्वित नहीं हो पाई। इसलिए वहां महिलाओं का विरोध है मुख्यमंत्री उन महिलाओं की तलाश करा रहीं हैं जिनके वोट भाजपा को नहीं मिलते हैं। तब तक यह योजना क्रियान्वित नहीं होगी। ऐसा मध्यप्रदेश में नहीं हुआ।

लेकिन बिहार में चतुराई पूर्वक 35 लाख महिलाओं को सीधे सीधे वोट के  अधिकार से वंचित कर दिया। ये वे बिहार के 6 जिले है जिनमें मुस्लिम महिला वोट अधिक है। ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी। दस हजार की प्रत्येक महिला को मिलने वाली यह चुनावी राशि भी बच जाएगी।

इधर कांग्रेस ने इन वोट से वंचित महिलाओं की आवाज़ उठाई और चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा कर दी। अब कुछ नहीं होने वाला। कांग्रेस ने प्रत्येक मतदान केंद्र की पहले सूची भी मांगी थी वह नहीं दी गई। अब जो एसआईआर के बाद आई सूची है उससे ही चुनाव होगा।

कहने का आशय यह है कि चुनाव आयोग और सरकार ने बिहार जीतने के लिए सारे दांव-पेंच क्लीयर कर लिए हैं। इसलिए उनकी चापलूस मीडिया जीत का ऐलान कर रही है।

यह सच है पिछले भाजपा शासन में भी बहुसंख्यक महिलाओं की पसंद भाजपा रही है। उसके मूल में घर बैठे पैसे का मिलना और धार्मिक रुझान है। जिसमें पीएम लगातार लगे हुए हैं। भले मंदिरों में प्रवेश शुल्क बढ़ गया हो लेकिन जो कायापलट कॉरपोरेट की भलाई के लिए किया उसे ये भक्त महिलाएं नहीं समझती हैं। वे मंदिरों को आकर्षक लुक में देखकर अभिभूत हैं इसीलिए मोदी सरकार इस आस्था को भुनाने में लगी है।

जहां तक दस हजार रुपए मिलने की बात है इसके बदले उनके पांच साल सुरक्षित हो जाएंगे। आपके दस हज़ार तो एक महीने में ही उड़ जाएंगे। बाद में महंगाई बढ़ जाएगी, टैक्स बढ़ेंगे, शिक्षा चिकित्सा महंगी होगी। यह समझ ना जाने कब महिलाओं को आएगी।

आरजेडी की दो प्रवक्ता कंचन यादव और प्रियंका भारती इस समय जिस तरह बिहार में सरकार की पोल खोल रही हैं या बिहार में जन्मीं नेहा सिंह राठौर लोकगीतों के ज़रिए जिस तरह सीधे सरकार से टकरा रहीं हैं उनके हौसलों से महिलाएं कुछ सीख पाएं तो अच्छा होगा। राहुल गांधी की संविधान बचाओ और वोट चोर गद्दी छोड़ बात पुरुष मतदाताओं को लुभा रही है। वामपंथी महिलाएं भी इसे चुनौती मान महिलाओं को जागरूक कर रही हैं।उधर प्रशांत किशोर वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार को खुलकर दर्ज करा रहे हैं।इस पर भी जनता को संज्ञान लेना चाहिए।

किंतु यह याद रखना होगा उनको दिया वोट इंडिया गठबन्धन को कमज़ोर करेगा। वे भाजपा की बी टीम के सक्रिय सदस्य हैं और कांग्रेस, आरजेडी तथा कम्युनिस्ट पार्टी के वोट काटने के लिए खड़े हुए हैं। अगर वे एक दो सीट जीत भी लेते हैं तो वे भाजपा का ही समर्थन करेंगे। वे भ्रष्टाचार के आरोप जुबानी लगा रहे हैं किसी भी मामले को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया है। यह सब एक सोचे समझे खेल की तरह है। उम्मीद है मतदाता भाजपा की इस साज़िश को समझेंगे। चंद रोज़ जो चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं के पास बचे हैं वे इन्हें जनता को समझाएं तथा मतदान के दौरान सतर्क रहें।

कुल मिलाकर मतदान के पूर्व भाजपा और जेडीयू ने जो तमाम साजिशें रची हैं उनके प्रति यदि चौकन्ने रहते हैं तो उनकी इस कथित जीत को हार में बदला जा सकता है। इतना समझ लीजिए बहुत कठिन है डगर पनघट की, किंतु ईमानदार कोशिश कभी परास्त नहीं होती है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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